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MPPSC Syllabus 2020 in Hindi pdf download : MPPSC syllabus 2020 in hindi

राज्य सेवा  (प्रारंभिक) परीक्षा पाठ्यक्रम प्रथम प्रश्न पत्र सामान्य अध्ययन MPPSC Syllabus 2020 in Hindi pdf download  : MPPSC  syllabus 2020 in hindi  1. मध्यप्रदेश का इतिहास, संस्कृति एवं साहित्य  -  • मध्यप्रदेश के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाएँ, प्रमुख राजवंश । • स्वतंत्रता आन्दोलन में मध्यप्रदेश का योगदान । - मध्यप्रदेश की प्रमुख कलाएँ एवं स्थापत्य कला। • मध्यप्रदेश की प्रमुख जनजातियाँ एवं बोलियाँ । प्रदेश के प्रमुख त्योहार, लोक संगीत, लोक कलाएँ एवं लोक-साहित्य । • मध्यप्रदेश के प्रमुख साहित्यकार एवं उनकी कृतियाँ । • मध्यप्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थल । • मध्यप्रदेश के प्रमुख जनजातीय व्यक्तित्व । 2. भारत का इतिहास  -  • प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत के इतिहास की प्रमुख विशेषताएँ, घटनाएँ एवं उनकी प्रशासनिक, सामाजिक तथा आर्थिक व्यवस्थाएँ। • 19वी एवं 20वी शताब्दी में सामाजिक तथा धार्मिक सुधार आंदोलन । • स्वतंत्रता संघर्ष एवं भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन । • स्वतंत्रता के पश्चात् भारत का एकीकरण एवं पुनर्गठन। 3. मध्यप्रदेश का भूगोल  - • ...

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 24 अप्रैल :

National Panchayati Raj Day  (राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 24 अप्रैल) :  ◆ पहला राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2010 में मनाया गया था ।  ◆ जनवरी 1957 में बलवंत राय मेहता समिति की अध्यक्षता के सिफारिश पर पंचायती राज व्यवस्था की स्थापना  ।  ◆ 73 वें संशोधन 1992 ने संविधान में एक नया भाग IX जोड़ा, जिसका शीर्षक "पंचायतों"  ◆ जिसमें अनुच्छेद 243 से 243 (O) तक के प्रावधान शामिल हैं ◆ 3 स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था  🔹1.ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत 🔹2.ब्लॉक स्तर पर पंचायत समिति  🔹3.जिला स्तर पर जिला परिषद ◆ पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 2 अक्टूबर, 1959 में राजस्थान के नागौर में पंचायती राज व्यवस्था का विधिवत उद्घाटन किया।  ◆ राजस्थान के नागौर देश का पहला राज्य बना जहां पंचायती राज को लागू किया गया। ◆ पंचायत राज मंत्री :  - नरेंद्र सिंह तोमर लोकसभा क्षेत्र  - मुरैना म.प्र । निम्न राज्यों में पंचायती राज व्यवस्था लागू नहीं है :- 1) नागालैंड 2) मिजोरम  3) दिल्ली को छोड़कर सभी केंद्र शासित प...

मोपला विद्रोह (1836-85): केरल मालाबार क्षेत्र

मोपला विद्रोह (1836-85 ई.) : केरल मालाबार क्षेत्र  • मोपला केरल के मालाबार क्षेत्र में लगभग 1000 वर्ष से अधिक समय से रह रहे अरब एवं मलयाली मुसलमान थे। ये अधिकतर छोटे किसान या व्यापारी थे। ब्रिटिश सरकार ने भू-स्वामियों के अधिकार का विस्तार करके उच्च जातीय हिन्दू नम्बूदरी एवं नायर भू-स्वामियों की शक्ति बढ़ा दी थी। इसके फलस्वरूप मोपलाओं ने विद्रोह किया। - इस विद्रोह ने साम्प्रदायिक रूप धारण कर लिया, क्योकि अधिकांश भू-स्वामी हिन्दू थे तथा काश्तकार मुसलमान थे। • मोपला किसान मालाबार के हिन्द नम्बूदरी एवं नायर उच्च जाति, भू-स्वामियों के बटाइदार या असामी काश्तकार थे। • नम्बूदरी और नायर जैसे उच्च जाति के भू-स्वामियों को शासन, पुलिस और न्यायालय से संरक्षण प्राप्त था। मुसलमानों के धार्मिक गुरु तथा स्थानीय नेता अली मुसलियार को गिरफ्तार कराने के प्रयास में मस्जिदों पर छापे मारे गए, परिणामस्वरूप पुलिस को विद्रोहियों के आक्रामक तेवरों का सामना करना पड़ा, कई विद्रोही मारे गए। • वर्ष 1921 में अली मुसलियार के नेतृत्व में पुन: इस आन्दोलन की शुर...

रामोसी आंदोलन (1822-41 ई.) :चित्तर सिंह और नरसिंह पेतकर

रामोसी आन्दोलन (1822-41 ई.) :  • रामोसी आन्दोलन महाराष्ट्र में अकाल तथा भूख की समस्या के चलते प्रारम्भ हुआ था। चित्तर सिंह एवं नरसिंह पेतकर इसके प्रमुख नेता थे। रामोसियों ने सतारा के आस-पास के क्षेत्रों को लूटा तथा किलों पर भी आक्रमण कर दिया।  1825-1826 ई. में भयंकर अकाल और अन्नाभाव के कारण इन्होंने उमाजी के नेतृत्त्व में पुनः विद्रोह किया। यह विद्रोह लगातार 1841 ई. तक चलता रहा। इस काल में नरसिंह दन्तत्रिय पेतकर के नेतृत्व में विस्तृत दंगे हुए।

आर्य समाज : स्वामी दयानंद सरस्वती #

आर्य समाज और स्वामी दयानंद सरस्वती : • आर्य समाज की स्थापना 1875 ई. में बम्बई में स्वामी दयानन्द सरस्वती ने की। 1877 ई. में इसका मुख्यालय लाहौर को बनाया गया था। • हिन्दू धर्म के दोषों को उजागर करने के साथ उन्होंने वेदों के अध्ययन पर बल दिया। स्वामी दयानन्द सरस्वती ने वेदों की ओर लौटों नारा दिया। • स्वामी दयानन्द सरस्वती ने गौसेवा के लिए गौरक्षिणी सभा की स्थापना की थी तथा गौकरुणानिधि नामक पुस्तक की रचना भी की थी।  - आर्य समाज का प्रसार पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान तथा महाराष्ट्र में अधिक हुआ था। - दयानन्द सरस्वती ने हिन्दू धर्म छोड़कर अन्य धर्म अपनाने वालों के लिए शुद्धि आन्दोलन चलाया था। - स्वामी दयानन्द सरस्वती ने आगरा में पाखण्ड-खाण्डिनीपताका फहराई थी। - इनके सहयोगी-लाला हंसराज ने 1886 ई. में दयानन्द एंग्लो वैदिक कॉलेज (लाहौर) तथा स्वामी श्रद्धानन्द ने गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार की स्थापना की थी।   स्वामी दयानंद सरस्वती :  स्वामी दयानन्द सरस्वती का जन्म 1824 ई. में गुजरात के मौरवी नामक स्थान पर...

थियोसोफिकल सोसायटी : एनी बेसेंट #

थियोसोफिकल सोसायटी  :  • थियोसोफिकल सोसायटी की स्थापना 1875 ई. में न्यूयॉर्क (अमेरिका) में मैडम हेलना ब्लावाट्स्की तथा कर्नल हेनरी ऑल्काट ने की थी। • 1883 ई. में मद्रास (चेन्नई) के निकट अड्यार नामक स्थान पर थियोसोफिकल सोसायटी का मुख्यालय बनाया गया। 1893 ई. में । आयरिश महिला ऐनी बेसेण्ट भारत आई और उन्होंने थियोसोफिकल सोसायटी का कार्यभार सम्भाला। ऐनी बेसेण्ट ने वर्ष 1915 में आयरलैण्ड के होमरूल लीग की तर्ज पर भारत में होमरूल लीग की स्थापना की। • थियोसोफिकल सोसायटी की हिन्दू धर्म की व्याख्या पारम्परिक तथा रूढ़िवादी थी। इसके कई भारतीय नेता-डॉ. भगवान दास तथा एस सुब्रह्मण्यम् अय्यर हिन्दू रूढ़िवादिता के समर्थक थे, लेकिन इनके  सामाजिक सिद्धान्त प्रगतिशील तथा महत्त्वपूर्ण थे। ऐनी बेसेण्ट : - ऐनी बेसेण्ट ने 1898 ई. में बनारस में सेण्ट्रल हिन्दू कॉलेज की स्थापना की थी, जिसे वर्ष 1916 में मदन मोहन मालवीय जी ने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया था।  - इनकी विचारधारा को देवा विज्ञान के नाम से भी जाना जाता था।  - ऐ...

रामकृष्ण मिशन : स्वामी विवेकानंद #

रामकृष्ण मिशन : • रामकृष्ण मिशन की स्थापना स्वामी विवेकानन्द ने 1897 ई. में वेलूर (कलकत्ता) में की थी। मिशन के दो मठ बारानगर (कलकत्ता) एवं मायावती (अल्मोड़ा) में स्थापित किए गए थे। - स्वामी विवेकानन्द ने फरवरी, 1896 ई. में न्यूयॉर्क में वेदान्त सोसायटी का गठन भारतीय धर्म एवं दर्शन के प्रचार के लिए किया था।  - स्वामी विवेकानन्द ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद आदि का समर्थन किया, क्योकि इनका मानना था कि ईश्वर साकार एवं निराकार दोनों है और उसकी अनुभूति प्रतीकों के रूप में की जा सकती है। स्वामी विवेकानंद :  स्वामी विवेकानन्द (नरेन्द्रदत्त) का जन्म 1863 ई. में कलकत्ता में हुआ था।  - ये 1893 ई. में अमेरिका के शिकागो में आयोजित प्रथम विश्व धर्म सम्मेलन में भाग लेने के लिए गए।  - अमेरिका जाने से पहले खेतड़ी के. राजा के सुझाव पर नरेन्द्र नाथ ने अपना नाम स्वामी विवेकानन्द रख लिया।  शिकागो धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानन्द ने सभी धर्मों की एकता के विषय में कहा था जिस प्रकार सभी धाराएँ अपने जल को सागर में ले जाकर मिला देती हैं,...